हमारे कंवर समाज की मासिक पत्रिका कंवरान दर्शन.

सगा बंधुओं,

जय पुरखा देव, जय दूल्हा देव, जय ठाकुर देव, जय कंवरान !!

हमें बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि हमारे समाज की त्रैमासिक पत्रिका कंवरान दर्शन का नियमित प्रकाशन शुरू हो चुका है. पहले प्रवेशांक फिर अप्रैल 2015 और मई 2015 और अब अक्टूबर-दिसंबर 2015 का अंक आ चुका है. उन सगा बंधुओं के लिए जो पत्रिका की hard copy प्राप्त नहीं कर सकते उनके लिए यह ऑनलाइन वेबसाईट बनाया गया है. यहाँ पर हरेक अंक को आप pdf फॉरमेट में डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं.

आपसे अनुरोध है कि कंवरान दर्शन से सक्रिय रूप से जुड़ें. अपने विचार भेजें या पोस्ट करें.

अपने क्षेत्रों के खास ख़बरों, महत्वपूर्ण बातों, अपने व्यक्तिगत विचारों को kanwarandarshan@gmail.com में भेजें. हम उन्हें पत्रिका में प्रकाशित करेंगे.

कंवरान दर्शन त्रैमासिक पत्रिका का मुख्य उद्देश्य कंवर समाज की आवाज और विचारों को एक दुसरे तक पहुँचाना. और समाज की एक संगठित मति या विचार बनाना है. अभी तक इतने बड़े कंवर समाज जो कि समझदारी और आधुनिकता के लिए जाना जाता है. उसकी अपनी खुद की पत्रिका नहीं होने से धीरे धीरे समाज के जगह जगह और घर घर के हिसाब से अलग अलग मति बनती जा रही है. यह जतर कतर मति सीधे समाज के एकता को कमजोर करती है.

हमें समझना होगा कि हम अलग हैं. किसी दूसरे समाज या हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई धर्म के पत्रिकाओं के भावों में हमारा मानसिक पोषण नहीं हो सकता. पहले हमें अपने विशिष्ट पहचान को जानना होगा. फिर बाहरी इन चीजों को.

पत्रिका की pdf कॉपी डाउनलोड करने के लिए ऊपर दिए लिंकों पर क्लिक करें.

धन्यवाद्.

– सादर,

कंवरान दर्शन टीम

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